Monday, January 5, 2015

शुभ प्रभात मित्रों!

॥ॐ॥
शुभ प्रभात मित्रों!
नया दिन है नया सबेरा
नये हैं हम सब लोग
वर्तमान ही सत्य हमेशा
यही सनातन योग।
॥ॐ॥

Sunday, January 4, 2015

खुदरा बेचते बेचते...

खुदरा
बेचते बेचते
गोदाम
ही खाली हो जाता..
समय
इसमें उसमें
बितता
चला
जाता..
खाली हो जाती
साँसोँ की
नगरी..
चलते
जिस पर
शब्दों के मुसाफिर..

--
*रश्मिप्रीत* http://sribhagwatgeeta.blogspot.com
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जिंदगी तो आदमी और जानवर....

जिंदगी
तो आदमी और जानवर
दोनों की गुजर ही जाती है
लेकिन
जानवर नहीं जानता
कि
जिंदगी गुजर रही है..
नहीं सोच पाता
कि
कैसी गुजरनी चाहिए

इस जगत में...

इस
जगत में
हर आदमी
व्यवसायी है
बेचने की कला का
अभ्यासी है हर कोई
मगर..

॥ ॐ नम: शिवाय ॥

॥ ॐ नम: शिवाय ॥
॥ ॐ सिया: नम: ॥
॥ ॐ राम: नम: ॥
॥ ॐ कृष्णा: नम: ॥
॥ ॐ कृष्ण: नम: ॥
॥ ॐ साँई नम: ॥
॥ ॐ ओशो नम: ॥
॥ ॐ सर्वबुद्धाय नम: ॥
॥ ॐ सर्वमित्राय नम: ॥
॥ शिवोऽहम ॥
॥ तत्वमसि ॥
*****(¥)*****
(((((( *_/\_* ))))))
॥ om shivah sharanam ॥
॥ om namah shivay ॥
॥ om siyah namah ॥
॥ om ramah namah ॥
॥ om krishnaah namah ॥
॥ om krishnah namah ॥
॥ om sai namah ॥
॥ om osho namah ॥
॥ om sarvabuddhay namah ॥
॥ om sarvamitray namah ॥
॥ shivoahm ॥
॥ tatvamasi ॥
*¥*
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*रश्मिप्रीत* http://sribhagwatgeeta.blogspot.com
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**मनुष्य की महत्ता**

**मनुष्य की महत्ता**
<:>
सारा अस्तित्व
परमात्मा में ही है
सारा अस्तित्व
परमात्मा ही है
सारा अस्तित्व
अंजान है
इससे
मगर..
एक मात्र प्राणी
मनुष्य..
जानने की कोशिश करता,
जान पाता,
क्योँकि
वह
अस्तित्व में
परमात्मा
के
सबसे समीप है...
सिर्फ...
"मैं"
भर की दूरी है
मनुष्य
और
परमात्मा
के बीच...
लेकिन
यह
"मैं"
भर की दूरी ही
जो
"महत्ता" है
"अस्मिता"
की..
उफ्..ऽऽ..
हे महामाया..
कृपा कर..
"तू" ही
मिटा पाने में सक्षम है इसे..
हे महामाया..
कृपा कर..!
<:>

सच तो यह है कि हम वहीं खोजते रहते....

सच
तो यह है
कि
हम
वहीं खोजते रहते
हमेशा..
"जो है"
और
वहीं खोते रहते
हमेशा..
"जो है"
क्योँकि
गलती से हम
वहीं खोजते रहते
हमेशा..
"जो नहीं है"
क्या करें
हम...?
? ?